इस ‘दरबार’ में फरियाद लेकर विदेशों से भी आते हैं श्रद्धालु, मान्यता ऐसी कि 2116 तक हो चुकी बुकिंग

देहरादून

देहरादून

भारत में एक जगह ऐसी है कि जो कोई मंदिर या मस्जिद नहीं है, लेकिन इस दरबार के प्रति लोगों की आस्था ऐसी है कि अगले सौ साल तक के लिए यहां बुकिंग हो चुकी है।जी हां, यह जगह है उत्तराखंड के देहरादून में स्थित दरबार साहिब। यहां हर साल आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ता है कि देखने वालों को भी आंखों पर यकीन नहीं होता।गुरू राम राय जी ने देहरादून में आकर डेरा डाला था। तब इसे डेरा दून कहा जाता था। लेकिन बाद मे अब यह देहरादून के नाम से विश्व विख्यात हुआ। इसी जगह पर यहां दरबार साहिब बनाया गया और यहां झंडे की स्थापना की की गई।

 

 

तब से आज तक यहां फाल्गुन मास की पंचमी तिथि तिथि को झंडे मेले का आयोजन होता है। साथ ही झंडे जी का आरोहण किया जाता है। इस मेले में भारत से ही नहीं बल्कि विदेशों से भी श्रद्धालु अपनी मुराद लेकर आते हैं। इस बार दून के प्रसिद्ध झंडा मेला का आगाज छह मार्च को होगाइसमें सबसे अधिक महत्व दर्शनी गिलाफ का होता है। मान्यता है कि, यहां मांगी मुराद झंडे जी पूरी करते हैं। इसका ही असर है कि, कैलाश चंद्र जुयाल के अनुसार वर्ष 2116 तक के लिए दर्शनी गिलाफ की बुकिंग हो चुकी है।

 

इसके अलावा शनील गिलाफ चढ़ाने की बुकिंग वर्ष 2041 के बाद के लिए शुरू हो गई हैइस बार लुधियाना के अर्जुन सिंह दर्शनी गिलाफ चढ़ाएंगे। गिलाफ चढ़ाने की बुकिंग 30 साल पहले अर्जुन सिंह के पिता ने कराई थी। सबसे पहले झंडे जी का दूध, दही, शहद आदि से विशेष अभिषेक किया गया। पुराने गिलाफ उतारे गए। इसके पश्चात सबसे पहले सूती फिर शनील और अंत में दर्शनी गिलाफ चढ़ाए जाते हैं।  जिसे देखने के लिए लाखों लोगों की भीड़ उमड़ती है।

Post Author: Sanjay Srivastava

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