पकौड़े पर बयान देना अमित शाह को पड़ गया भारी, मुक़दमा दर्ज

पकौड़े बेचने के बयान से पढ़े-लिखे युवा हताश

मुजफ्फरनगर। देश में पकौड़े की राजनीति अब गर्म होती जा रही है। साथ ही आम जनता की तरफ से भी इस मामले में प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। खासकर बेरोजगार युवा इस बयान बार नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। वहीं सरकार पीएम के इस बयान को सही साबित करने में जुटी हुई। वहीं बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने राज्यसभा में इस बयान का समर्थन किया था। उन्होंने कहा कि बेरोजगार युवाओं के लिए पकौड़े बेचने में कोई बुराई नहीं है। इस मामले में उनके खिलाफ मुजफ्फरनगर कोर्ट में परिवाद दायर किया गया। परिवाद में इस बयान को पढ़े-लिखे युवाओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला बताया गया है। वहीँ इस मामले में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी( सीजेएम) हरि प्रसाद की कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के लिए 28 फरवरी की तारीख तय की है।

इस मामले में सामाजिक कार्यकर्ता तमन्ना हाशमी ने परिवाद दायर किया है। हाशमी ने अपनी याचिका में कहा कि अमित शाह के बयान से पढ़े-लिखे युवा आहत हुए हैं। अगर सरकार युवाओं को नौकरी नहीं देती तो कम से कम उनका मजाक तो न उड़ाए। उन्होंने सवाल पूछते हुए कहा कि क्या सभी युवा पकौड़े बेचने के लिए पढ़ाई करते। शाह के इस बयान से नौकरी के लिए लाइन में लगे युवाओं में निराशा है।

बता दें कि देश भर में पीएम मोदी के पकौड़े वाले बयान को लेकर विरोध प्रदर्शन चल रहा है। वहीं विपक्ष के नेता पीएम के इस बयान लेकर चुटकी लेते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस मामले में पिछले दिनों बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने बीते पांच फरवरी को पहली बार राज्यसभा में भाषण दिया था। इस दौरान उन्होंने पीएम मोदी के एक टीवी इंटरव्यू के चर्चित पकौडा रोजगार के बयान का बचाव करते हुए कहा कि पकौड़ा बेचना शर्म की बात बिल्कुल नहीं है। शाह ने राज्यसभा में कहा था कि मैं मानता हूं कि भीख मांगने से अच्छा है कि कोई चाय या पकौड़े बेचे। आज चाय वाले का बेटा पीएम बना है। सामाजिक कार्यकर्ता हाशमी के परिवार को स्वीकार करते हुए कोर्ट ने सुनवाई के लिए 28 फरवरी की तिथि मुकर्रर की है। इस पर सभी की निगाहें टिकीं हैं।

Post Author: thesundayviews

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